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MP में ‘ईंधन संकट’ की खबर महज अफवाह: पेट्रोल पंपों पर भीड़ के बाद सरकार सख्त; भ्रम फैलाने वालों पर होगी FIR

भोपाल (25 मार्च 2026): मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और सभी ऑयल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।

प्रमुख बिंदु (HighLights):

  • पर्याप्त स्टॉक: प्रदेश में प्रतिदिन की औसत खपत 1.35 करोड़ लीटर है, जिसके मुकाबले भंडारण क्षमता और आवक पूरी तरह संतुलित है।

  • अफवाह पर एक्शन: इंटरनेट मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों को चिन्हित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • पंपों पर स्थिति: कई जिलों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल का सहयोग लेना पड़ा।

  • आंकड़ों का सच: प्रदेश के लगभग 4,500 पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सप्लाई निरंतर जारी है।


क्यों बनी भ्रम की स्थिति?

मंगलवार देर शाम इंटरनेट मीडिया (WhatsApp और Facebook) पर कुछ संदेश प्रसारित हुए, जिनमें दावा किया गया कि ऑयल कंपनियों ने सप्लाई में कटौती कर दी है।

  1. पैनिक बाइंग: इस खबर के बाद लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने और बोतलों में पेट्रोल भरने के लिए पंपों पर टूट पड़े।

  2. प्रशासनिक दखल: भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में कई जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, जिसे पुलिस ने संभाला।

अधिकारियों का पक्ष: “डरने की जरूरत नहीं”

खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा:

“सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार है। जितनी खपत होती है, उतनी ही आपूर्ति निरंतर सुनिश्चित की जा रही है। कमी या कटौती जैसी कोई स्थिति प्रदेश में कहीं भी नहीं है।”


सावधान: अफवाह फैलाना पड़ेगा महंगा

राज्य सरकार ने साइबर सेल को सक्रिय कर दिया है। जो लोग भ्रामक वीडियो या मैसेज बनाकर पैनिक (दहशत) फैला रहे हैं, उनके खिलाफ IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए जिला कलेक्टरों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।


निष्कर्ष: संयम बरतें आम नागरिक

ईंधन की कोई कमी नहीं है, इसलिए जरूरत से ज्यादा स्टॉक करने की होड़ न मचाएं। पैनिक बाइंग के कारण ही अक्सर कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) पैदा होती है, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को परेशानी होती है।

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