धार जिले के कारम बांध का फूटना प्राकृतिक नहीं मानवजनित आपदा थी। इसमें हर स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई। यह बात जल संसाधन विभाग के तत्कालीन सचिव और जांच …और पढ़ें

कारम बांध को लेकर जांच रिपोर्ट में इंजीनियरों की घोर लापरवाही उजागर (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
- जांच रिपोर्ट में इंजीनियरों की घोर लापरवाही उजागर
- कारम बांध का फूटना मानवजनित आपदा थी- जांचकर्ता
- जांच रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की पोल खोल डाली है
भोपाल। धार जिले के कारम बांध का फूटना प्राकृतिक नहीं मानवजनित आपदा थी। इसमें हर स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई। बांध निर्माण संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया। तत्कालीन कार्यपालन यंत्री बीएल निनामा को पदीय दायित्वों और अनुबंध का निष्पादन कैसे किया जाता है, उसका समुचित ज्ञान नहीं है। वह वरिष्ठ अभियांत्रिकीय दायित्व के निर्वहन के लिए योग्य अधिकारी प्रतीत नहीं होते हैं। यह बात जल संसाधन विभाग के तत्कालीन सचिव और जांचकर्ता अधिकारी जान किंग्सली एआर ने अपनी रिपोर्ट में कही है।
उधर, प्रदेश कांग्रेस ने रिपोर्ट के हवाले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर विभागीय मंत्री तुलसीराम सिलावट को मंत्री पद से हटाने और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2022 में निर्माणाधीन बांध के क्षतिग्रस्त होने से ना केवल प्रदेश को वित्तीय हानि हुई बल्कि आसपास के लोगों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा था। डाउनस्ट्रीम क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। लगभग एक सप्ताह तक राहत एवं बचाव कार्य चलाने पड़े।
सितंबर 2022 में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय जांच प्रारंभ की गई। प्रभारी मुख्य अभियंता सीएस घटोले, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री धार पी जोशी, तत्कालीन कार्यपालन अधिकारी बीएल निनामा, अनुविभागीय अधिकारी धामनोद विकार अहमद सिद्दीकी और तत्कालीन उप यंत्री विजय कुमार जत्थाप के विरुद्ध आरोप प्रमाणित पाए गए। उपयंत्री राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार राम और दशावन्ता सिसोदिया के विरुद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आरोपित इंजीनियरों ने इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी अपने पक्ष में तर्क दिया कि बांध सुरक्षित था। रिपोर्ट के इस निष्कर्ष को आधार बनाकर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रहीं संगीता शर्मा ने प्रधानमंत्री को रिपोर्ट के निष्कर्ष के हवाले से पत्र लिखा कि गंभीर आरोपों के बाद संबंधित निलंबन से बहाल कर जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण तकनीकी संस्था ब्यूरो ऑफ डिजाइन (बोधी) में संचालक (बांध) का प्रभार दे दिया गया।
यह मामला केवल बांध की तकनीकी विफलता का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और शासन व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है, इसलिए मंत्री जल संसाधन तुलसीराम सिलावट की जवाबदेही तय की जाना चाहिए।




