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पुराने नियमों की कमियां होंगी दूर, डेवलपर्स के सुझावों के साथ तैयार होगा नया ढांचा

 

मध्य प्रदेश में लंबे समय से चल रही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक कॉलोनाइजर एक्ट बनाने की कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। वर्तमान एक्ट में जो कम …और पढ़ें

कॉलोनाइजर एक्ट 2026: पुराने नियमों की कमियां होंगी दूर, डेवलपर्स के सुझावों के साथ तैयार होगा नया ढांचा

कॉलोनाइजर एक्ट 2026 की पुराने नियमों की कमियां होंगी दूर

HighLights

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों जैसे होंगे नियम, अवैध कालोनी की रोकथाम के लिए कड़े होंगे प्रविधान
  2. कॉलोनाइजर एक्ट का ही हिस्सा रहेंगे अवैध कालोनियों पर नियंत्रण के प्रविधान
  3. प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले 22 अप्रैल को डेवलपरों के साथ होगी बैठक

भोपाल। प्रदेश में लंबे समय से चल रही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक कॉलोनाइजर एक्ट बनाने की कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। वर्तमान एक्ट में जो कमियां हैं, उनमें सुधार के सुझाव डेवलपरों ने दिए हैं। इसे शामिल करते हुए प्रारूप को अंतिम रूप देने 22 अप्रैल को फिर बैठक होगी।

अवैध कालोनियों पर नियंत्रण के प्रविधान कॉलोनाइजर एक्ट का हिस्सा रहेंगे। अव्वल तो प्रयास यही रहेगा कि अवैध कॉलोनी बने ही न और यदि कहीं बन गई तो उसके लिए ऐसे कड़े प्रविधान रहें कि आगे फिर कभी ऐसा न हो। इसके लिए डेवलपर का लाइसेंस तो रद किया ही जाएगा, संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।

 

उनकी गोपनीय चरित्रावली में इसे दर्ज किया जाएगा। नगरीय विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल होने के कारण औद्योगिकीकरण तेजी से हो रहा है।

शहर और उससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय आवश्यकता की मांग भी बढ़ी है। इसके कारण कालोनियों बन तो रही हैं लेकिन उनका विकास व्यवस्थित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में नियम का पालन कड़ाई से न होने और बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल होने पर अधोसंरचना विकास से जुड़ी कठिनाइयां सामने आ रही हैं। वहीं, अवैध कालोनी भी बड़ी समस्या है। चूंकि, डेवलपर इन्हें बनाकर अलग हो जाते हैं और परेशानियां का सामना रहवासियों को करना पड़ता है इसलिए सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक जैसे प्रविधान वाला कॉलोनाइजर एक्ट लागू करना चाहती है।

इस बीच, डेवलपरों ने भी अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय विकास एवं आवास विभाग इससे सहमत हैं तो उन्हें भी कोई विशेष आपत्ति नहीं है। बस वे यही चाहते हैं कि उनके हितों का भी ध्यान रखा जाए। प्रक्रिया की जटिलता समाप्त हो और सभी अनुमतियां निश्चित समयसीमा में एक स्थान से ही मिल जाएं।

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