भोपाल के बड़े तालाब में 120 नावें बिना लाइसेंस चल रही थीं। जांच में सुरक्षा खामियां मिलीं। नगर निगम ने संचालन रोका, बाद में 41 नावों के लाइसेंस नवीनीक …और पढ़ें

भोपाल के बड़े तालाब में सामने आई बड़ी लापरवाही। (फोटो- नईदुनिया प्रतिनिधि)
HighLights
- बड़े तालाब में दो साल से बिना लाइसेंस नावें चल रहीं।
- जांच में सुरक्षा उपकरण और लाइफ जैकेट बेहद खराब मिलीं।
- नगर निगम ने सभी अवैध नावों का संचालन तुरंत रोक दिया।
भोपाल। भोपाल के बड़े तालाब में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के दावों के बीच बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां पिछले दो वर्षों से करीब 120 नावें बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रही थीं, जिनमें कई नावों में सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की जा रही थी।
यह खुलासा तब हुआ जब बरगी डैम हादसे के बाद प्रशासन ने जल स्रोतों में सुरक्षा को लेकर सख्ती शुरू की। नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ द्वारा की गई जांच में सामने आया कि वर्ष 2024 के बाद से इन नावों के लाइसेंस का नवीनीकरण ही नहीं कराया गया था।
इस खुलासे के बाद प्रशासन हरकत में आया और बिना लाइसेंस संचालित नावों को तत्काल प्रभाव से बंद कर किनारे बंधवा दिया गया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई नावों में रखी लाइफ जैकेटें बेहद खराब स्थिति में थीं, जिनके बेल्ट टूटे हुए थे या वे उपयोग के लायक नहीं थीं।
जांच में उजागर हुई बड़ी खामियां
नगर निगम के अधिकारियों ने जब बोट क्लब पहुंचकर निरीक्षण किया तो पाया कि अधिकांश नावों में सुरक्षा उपकरण केवल दिखावे के लिए रखे गए थे। लाइफ जैकेट्स की स्थिति इतनी खराब थी कि वे दुर्घटना के समय मदद करने के बजाय खतरा बन सकती थीं।
लाइसेंस नवीनीकरण में जुटे संचालक
कार्रवाई के बाद मंगलवार को नाव संचालक लाइसेंस नवीनीकरण के लिए बोट क्लब पहुंचे। दिनभर चली प्रक्रिया में 41 निजी नाव संचालकों ने अपने लाइसेंस रिन्यू कराए, जिससे नगर निगम को करीब 5.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
प्रशासन की सख्ती से बढ़ी हलचल
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद बोट क्लब क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी नियमित जांच की जाएगी और बिना लाइसेंस या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सैलानियों के लिए बड़ा आकर्षण
बड़े तालाब में नौकायन भोपाल के पर्यटन उद्योग का प्रमुख इंजन है। बोट क्लब पर हर रोज औसतन 2500 से 3000 लोग पहुंचते हैं। इनमें से कम से कम 1500 से 2000 लोग पैडलबोट, शिकारा अथवा डोंगी की सवारी जरूर करते हैं। अनुमान है कि यह 15 से 20 करोड़ सालाना का कारोबार है। इस व्यवस्था की निगरानी और प्रबंधन पर्यटन विकास निगम और भोपाल नगर निगम के पास है। इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है।




