नगर निगम ने शहर में ऐसे 69 बड़े कचरा उत्पादकों को चिह्नित किया है, जो अपने गीले कचरे का निपटारा स्वयं कर रहे हैं। वहीं अन्य कचरा उत्पादकों को कचरे के निपटारे को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उल्लंघन करने वाले संस्थानों से 150 प्रतिशत तक जुर्माना
नगर निगम द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों से 150 प्रतिशत तक जुर्माना वसूला जाएगा। निगम ने बड़े कचरा उत्पादकों का पंजीयन शुरू कर दिया है। इसके लिए जल कार्य और बिल्डिंग परमिशन के आधार पर संस्थानों की पहचान की जा रही है। इसके बाद निगम कर्मचारी उनसे संपर्क कर पंजीयन कर रहे हैं। पंजीयन के बाद संस्थानों को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
ये हैं बड़े कचरा उत्पादकों की श्रेणी
ऐसी संस्थाएं जिनका फ्लोर एरिया 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक है।
जिनका दैनिक पानी उपभोग 40 हजार लीटर या उससे अधिक है।
जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करती हैं।
बड़े कचरा उत्पादकों के लिए तय दरें
हाउसिंग सोसायटियों और आवासीय कालोनियों के लिए 2,100 रुपये प्रति टन।
केंद्र व राज्य सरकार के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्कूलों, कालेजों और विश्वविद्यालयों जैसी संस्थागत श्रेणी के लिए 2,400 रुपये प्रति टन।
व्यावसायिक श्रेणी, जिसमें माल, मल्टीप्लेक्स, होटल, अस्पताल, मैरिज हाल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं, उनके लिए 2,700 रुपये प्रति टन की दर तय की गई है।
कचरे को अलग करने में कोताही पर कार्रवाई
नगर निगम के अनुसार अब कचरे का पृथक्कीकरण नहीं करने पर सख्ती बरती जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अलग किए मिक्स कचरा ट्रांसफर स्टेशन या निगम के वाहनों में भेजता है, तो उस पर निर्धारित दर का 150 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा।
वहीं, जो संस्थान कचरे को अलग-अलग करके स्वयं गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन भेजेंगे, उन्हें केवल 922 रुपये प्रति टन की रियायती दर का लाभ मिलेगा।
देश का पहला शहर
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को ध्यान में रखते हुए बड़े कचरा उत्पादकों के लिए नियम लागू कर दिए गए हैं। बड़े कचरा उत्पादकों को चिह्नित भी किया जा रहा है। भोपाल इसके लिए पोर्टल तैयार करने वाला देश का पहला शहर बन गया है। कई बड़े कचरा उत्पादकों ने इस पर पंजीयन भी करा लिया है।




