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हरी-भरी वादियों वाले भोपाल को क्या हुआ? 5 साल में 13 गिरफ्तारियां, जानिए क्यों आतंकियों के लिए ‘सेफ जोन’ बना शहर

 

भोपाल। संगठित अपराध से दूर शांत और हरीभरी वादियों वाला भोपाल शहर फिर से गलत कारणों से चर्चा में है। एटीएस ने बीते दिनों यहां के बैरसिया इलाके से एक संदिग्ध आतंकी मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया है। यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। पिछले पांच वर्षों में यहां ऐसे 13 लोगों को पकड़ा जा चुका है जो आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे।

इतनी बड़ी संख्या में इनकी यहां उपस्थिति बता रही है कि प्रदेश की राजधानी ही आतंकियों के लिए “सेफ जोन” बन गई है।

आंतकियों से ऑनलाइन प्रशिक्षण ले रहा था फराज

संदिग्ध आतंकी मोहम्मद फराज इंटरनेट की मदद से पाकिस्तानी संगठन से वैचारिक कट्टरपंथ और विध्वंसक गतिविधियों का प्रशिक्षण ले रहा था। बताया जा रहा है कि फराज और उसके जैसे कुछ और युवकों को मैदानी प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजने की भी तैयारी थी। फराज ने पासपोर्ट भी बनवा लिया था।

एटीएस में रहे अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के संगठनों की रणनीति में अब बदलाव देखने को मिल रहा है। घने मुस्लिम आबादी वाले शहरी इलाकों के बाद अब उन्होंने बैरसिया जैसे बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। आतंकियों के लिए भोपाल का ऐशबाग, निशातपुरा, छोला और गौतम नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाके हमेशा से सुरक्षित ठिकाने रहे हैं।

युवाओं का ब्रेनवाश करते हैं आतंकी

एटीएस के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि इन क्षेत्रों में लोग आसानी से घुलमिल जाते हैं और स्थानीय युवाओं का ब्रेनवाश करते हैं। इस पूरे खेल में सबसे बड़ी ढाल बनते हैं स्थानीय मकान मालिक, जो महज थोड़े से किराये के लालच में बाहरी लोगों को मकान देते हैं और पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराते। यही लापरवाही स्थानीय थानों को भनक लगे बिना आतंकियों को छिपने का मौका दे देती है।

पिछले वर्षों में ये मामले सामने आए

– मार्च, 2022 में एटीएस ने ऐशबाग की अहमद नगर कालोनी से प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। बाद में एनआईए ने जांच का काम संभाला और कुल 10 संदिग्धों (छह बांग्लादेशी नागरिक) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिस पर विशेष कोर्ट में सुनवाई जारी है।

– मई, 2023 में हिज्ब-उत-तहरीर (एचयूटी) संगठन के एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ, जिसके तार भोपाल, छिंदवाड़ा और हैदराबाद से जुड़े थे। मामला कोर्ट में है।

– कार्रवाई का यह सिलसिला साल 2025 से जारी रहा है, जब जून के महीने में एनआइए और एटीएस ने संयुक्त रूप से ऐशबाग में छापेमारी कर टेरर फंडिंग के आरोप में एक संदिग्ध को पकड़ा। इसी दौरान निशातपुरा में एक निजी कॉलेज के पास से पाकिस्तान के संदिग्ध वाट्सएप ग्रुप में सक्रिय एक स्थानीय युवक को भी दबोचा गया था।

– अक्टूबर, 2025 में कुख्यात वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से संबंधों के आरोप में एक युवक को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पकड़ा।

सुरक्षा एजेंसियां खंगाल रही हैं स्थानीय इनपुट

सुरक्षा एजेंसियां अब फराज के स्थानीय संपर्कों और मददगारों की कुंडली खंगालने में जुटी हैं, ताकि इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि भोपाल पर मंडरा रहा खतरा अभी टला नहीं है, बल्कि इसके लिए सतर्क रहने की जरूरत है।

प्रदेश में जांच एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के बाद ही इन संदिग्ध आतंकियों का नेटवर्क ध्वस्त हो रहा है। एजेंसियों की सक्रियता के कारण ही वह प्रदेश और उसक

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