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मीनाक्षी नटराजन का भाजपा पर बड़ा आरोप, कहा- संख्या बल न होने पर भी उतारा उम्मीदवार, रिटर्निंग ऑफिसर ने पहुंचाया लाभ

 

भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। 230 सदस्यीय विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार दो सीटें भाजपा और एक कांग्रेस को मिलनी चाहिए थी, लेकिन कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी शपथ पत्र में न देने के कारण निरस्त हो गया। पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई लेकिन चुनाव याचिका से जुड़ा मामला बताते हुए नए सिरे से याचिका दायर करने के लिए कहा गया।

हैदराबाद में पत्रकार वार्ता: षडयंत्र के तहत हुई कार्रवाई

मीनाक्षी ने रविवार को हैदराबाद में अपना नामांकन निरस्त किए जाने का मुद्दा पत्रकार वार्ता करके उठाया। कहा कि संख्याबल न होने के बाद भी भाजपा ने जब तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी यह साफ हो गया था कि षडयंत्र होगा और वही हुआ।

मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि जिस मामले को आधार बनाकर उनका नामांकन निरस्त किया गया, वह बनता ही नहीं है और यह सिद्ध हो जाएगा। मामले से ध्यान भटकाने के लिए पार्टी के भीतर अंतर्कलह की बात फैलाई जा रही है, वह निराधार है और हम सब एकजुट हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मीनाक्षी की हैदराबाद की पत्रकारवार्ता का वीडियो जारी किया।

रिटर्निंग ऑफिसर और चुनाव नियमों पर उठाए सवाल

मीनाक्षी ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर काम किया। झारखंड में अलग व्यवस्था और मध्य प्रदेश में अलग व्यवस्था अपनाई गई। जिस मामले को लेकर भाजपा की आपत्ति पर निर्णय लिया गया, दरअसल, वह आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप में आता ही नहीं है।

जिस मामले पर न्यायालय ने ही संज्ञान नहीं लिया, उसे आधार बनाया गया। नोटिस आपराधिक प्रकरण कैसे हो सकता है। उस व्यक्तिगत याचिका को ही न्यायालय द्वारा 12 जून को खारिज कर दिया गया है, क्योंकि मामला उसके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है। हम इस मामले को लेकर चुनाव याचिका दायर करने वाले हैं।

चुनाव आयोग के मौन और प्रशासन की मिलीभगत का आरोप

मीनाक्षी ने कहा कि राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 58 विधायक होने चाहिए थे, जबकि भाजपा के पास 48 ही थे। जब भाजपा ने यह देखा कि हमारे पूरे विधायक एकजुट हैं और डर या पैसों के दम पर तोड़-फोड़ संभव नहीं है तो दूसरा रास्ता अपनाया गया।

रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में नियम विरुद्ध तरीके से भाजपा और प्रशासन के लोग मौजूद थे। जबकि, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को जाने नहीं दिया। चुनाव आयोग ने इस मामले में मौन साधकर रखा, जिससे मिलीभगत प्रमाणित होती है।

आरोपों से घिरे नेता पर कांग्रेस का रुख

जहां तक मामले से जुड़ी महिला के आरोपों का सवाल है तो कांग्रेस पूरी तरह उसके साथ खड़ी है। जिस व्यक्ति पर आरोप लगाए, उसे 2023 में उसका टिकट काटा गया, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया और निलंबित भी किया।

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