भोपाल । प्रदेश के सबसे बड़े सांस्कृतिक केंद्र रवींद्र भवन की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। संस्कृति संचालनालय ने अप्रैल 2025 में विजय शंकर श्रवण को पूर्णकालिक प्रबंधक के रूप में पदस्थ किया, लेकिन डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें उनके पद के अनुरूप प्रशासनिक अधिकार और जिम्मेदारियां नहीं सौंपी गईं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शासन ने प्रबंधक की नियुक्ति कर दी, तो फिर रवींद्र भवन का प्रशासनिक संचालन आखिर किसके भरोसे चल रहा है?
संस्कृति संचालनालय के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्रबंधक को उनके पद के अनुरूप कार्य, दायित्व और जिम्मेदारियां निर्धारित करते हुए कार्यादेश जारी किया जाए, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज और मौजूदा व्यवस्था इस आदेश के पालन पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में रवींद्र भवन का प्रशासनिक संचालन सहायक संचालक एवं कार्यालय प्रमुख मधु चौधरी के स्तर से किया जा रहा है, जबकि सहायक संचालक का मूल दायित्व आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) के रूप में वित्तीय और भुगतान संबंधी कार्यों का होता है।
ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब रवींद्र भवन में पूर्णकालिक प्रबंधक पदस्थ हैं, तब प्रशासनिक नियंत्रण किस आदेश के तहत किसी अन्य अधिकारी के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
प्रबंधक के जिम्मे होने चाहिए ये काम
शासन के अनुसार प्रबंधक का दायित्व कार्यालय प्रबंधन से जुड़े सभी कार्यों का संचालन करना है। इनमें नस्तियों का प्रबंधन और परीक्षण, वित्तीय नियमों का परीक्षण, जेम पोर्टल संबंधी कार्य, भंडार शाखा का संचालन, आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति और प्रतिपूर्ति की निगरानी तथा कार्यालय प्रमुख और लेखापाल के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यालय संचालन शामिल है।
पहले मैं उस्ताद अलाउद्दीन खां अकादमी में काम करता था। संस्कृति संचालनालय से जारी आदेश के तहत यहां बतौर प्रबंधक आया हूं। अभी मेरे पास कला अकादमी के पुराने काम को अपडेट करने का छोटा-सा काम है। इसके अलावा प्रबंधक की हैसियत से यहां बैठ रहा हूं, दायित्व के तौर पर अभी कुछ नहीं है। – विजय शंकर श्रवण, प्रबंधक, रवींद्र भवन
जवाब देने से किया इंकार
इस संबंध में जब संचालक संस्कृति एनपी नामदेव से सवाल पूछा गया कि रवींद्र भवन में प्रबंधक के पद पर संचालनालय ने विजय शंकर श्रवण को पदस्थ किया था, उनका आखिर काम क्या है? तो उन्होंने कहा कि, काम तो वे ही बता पाएंगे।
संचालक संस्कृति से यह कहने पर कि रवींद्र भवन की कार्यालय प्रमुख मधु चौधरी ने सारे अधिकार अपने हाथ में ही रखे हैं, विजय शंकर खाली बैठे हैं? तो इस सवाल का जवाब देने से उन्होंने इंकार कर दिया।




