एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / राजनीतिक डेस्क
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर गरमाई सियासत: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल और सीएम को लिखा पत्र, इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
भोपाल: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के मामले को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। जबलपुर उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद अब कांग्रेस पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इस आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग उठाई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस संबंध में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मौजूदा भाजपा सरकार पर अदालतों में कमजोर पैरवी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि राज्य में 27% ओबीसी आरक्षण की कानूनी राह को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयास किए जाएं। गौरतलब है कि नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों को अदालतों में न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्राप्त होता है।
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कमल नाथ का सरकार पर हमला: पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले सात वर्षों में सरकार ने अदालतों में इस मामले की प्रभावी पैरवी नहीं की है। उन्होंने मांग की है कि ओबीसी आबादी के प्रामाणिक आंकड़े सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाएं और इस अधिकार को बचाने के लिए पूरी तैयारी से कानूनी लड़ाई लड़ी जाए, जिसमें कांग्रेस पार्टी हरसंभव सहयोग के लिए तैयार है।
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भाजपा का पलटवार: दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इन आरोपों पर पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेष वाजपेयी ने कमल नाथ सरकार के 2019 के कार्यकाल के दौरान लाए गए अध्यादेश और संशोधन कानूनों की विधिक कमजोरियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उस दौरान पर्याप्त कानूनी तैयारी और स्पष्टता सुनिश्चित क्यों नहीं की गई थी, इसका जवाब कांग्रेस को देना चाहिए।
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कानूनी और राजनीतिक खींचतान: हाई कोर्ट द्वारा 2019 के 27% आरक्षण के नियमों को निरस्त करने और 13% पदों को होल्ड रखने के निर्देश के बाद से ही राज्य में राजनीतिक दल आमने-सामने हैं। सरकार जहां सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेर रहे हैं।




