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अब रिहायशी इलाकों में नहीं चलेंगी दुकानें, MP के सभी नगर निगमों से 15 मई तक मांगी रिपोर्ट

 

तमिलनाडु के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख का असर मध्य प्रदेश में भी दिखेगा। वजह यह कि मध्य प्रदेश में भी आवासीय क्षेत्रों का ब …और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश: अब रिहायशी इलाकों में नहीं चलेंगी दुकानें, MP के सभी नगर निगमों से 15 मई तक मांगी रिपोर्ट

SC – रिहायशी इलाकों में नहीं चलेंगी दुकानें।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश
  2. रिहायशी इलाकों में नहीं चलेंगी दुकानें
  3. नगर निगमों से 15 मई तक मांगी रिपोर्ट

भोपाल। तमिलनाडु के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख का असर मध्य प्रदेश में भी दिखेगा। वजह यह कि मध्य प्रदेश में भी आवासीय क्षेत्रों का बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। यही स्थिति अन्य राज्यों में भी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि नगर निगम-निकाय और संबंधित प्राधिकरण विस्तृत जांच कर यह पहचान करें कि किन-किन आवासीय क्षेत्रों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

शपथ पत्र में आयुक्तों के हस्ताक्षर होंगे जरूरी

इसके लिए प्रदेश सरकार नगरीय निकायों से ऐसे आवासीय क्षेत्रों को चिह्नित कराने जा रही है। ऐसे सभी मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार कर शपथ पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें नगर निगम आयुक्तों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में साफ कहा है कि यह प्रवृत्ति केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे उन नागरिकों के अधिकारों पर भी सीधा असर पड़ता है जिन्होंने अपने घर शांति और सुरक्षित आवासीय वातावरण की उम्मीद में खरीदे थे।

 

शहरी व्यवस्था पर अवैध उपयोग का असर

इस तरह के अवैध भूमि उपयोग से शहरी व्यवस्था, ट्रैफिक, पर्यावरण और नागरिक जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर और दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल सीमित क्षेत्रों तक नहीं रहेगा, बल्कि सभी रिहायशी कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और यहां तक कि उन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जो तकनीकी रूप से नगर सीमा के बाहर होने का दावा करते हैं, लेकिन व्यवहार में शहरी ढांचे का हिस्सा हैं।

अधिकारियों की मिलीभगत पर तल्ख टिप्पणी

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने तमिलनाडु के लोगनाथन मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पूरे देश में ऐसी स्थिति बनी हुई है जहां पूरी बिल्डिंग बन जाने के बाद ही नगर निगम को नींद से जगाया जाता है। अदालत ने इसे निगम अधिकारियों की मिलीभगत करार देते हुए कहा कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतनी बड़ी अनियमितता संभव नहीं है।

प्रमुख निर्देश और समय सीमा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी राज्यों की राजधानियों के नगर निगम कमिश्नर अपने क्षेत्रों में जांच करेंगे और शपथ पत्र दाखिल करेंगे। सभी नगर निकायों को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 15 मई 2026 तक जमा करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 को निर्धारित की गई है।

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