भोपाल। शहर में मौसम के दोहरे मिजाज ने शहरवासियों को अस्पताल पहुंचाना शुरू कर दिया है। अप्रैल की शुरुआत के साथ ही बढ़ती गर्मी और बीच-बीच में होने वाली बूंदाबांदी से पैदा हुई उमस ने संक्रामक रोगों को तेजी से फैलाया है।
इसका सबसे बड़ा असर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में देखने को मिला, जहां मरीजों का सैलाब उमड़ रहा है और एक ही दिन में ओपीडी का आंकड़ा 5168 के पार पहुंच गया। एम्स ही नहीं हमीदिया, जेपी और जवाहरलाल नेहरू गैस राहत अस्पताल में भी मरीजों की भीड़ देखी जा रही है।
कामकाजी युवा और मध्यम आयु वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
हैरानी की बात यह है कि इस बार बीमारियों का सबसे ज्यादा प्रहार युवाओं और मध्यम आयु वर्ग पर हो रहा है। एम्स के आंकड़ों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने वाले कुल मरीजों में सबसे बड़ा हिस्सा 26 से 45 वर्ष के कामकाजी युवाओं (37.97%) का है। इसके बाद 15 से 25 वर्ष के युवाओं की संख्या लगभग 20 प्रतिशत रही।
शहर के प्रमुख अस्पतालों में एम्स भोपाल में 5168 मरीज (सर्वाधिक दबाव), हमीदिया अस्पताल में 2200 (पंजीयन काउंटरों पर लंबी कतारें), जेपी जिला अस्पताल में 1800 (मेडिसिन विभाग में भीड़) और जवाहरलाल नेहरू गैस राहत अस्पताल में 700 (सांस और त्वचा के मरीज ज्यादा) मरीज पहुंचे हैं।
थर्मल शॉक और पेट के संक्रमण का खतरा
शहर के डॉक्टरों से बातचीत में सामने आया कि वर्तमान में अस्पतालों में आने वाले 10 में से छह मरीज मौसमी बीमारियों से ग्रसित हैं। जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. पुष्पेंद्र मिश्रा ने बताया कि ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज तेज सिरदर्द, शरीर में ऐंठन और वायरल लोड की शिकायत लेकर आ रहे हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है।
लोग ठंडे एसी वाले कमरों से अचानक 40 डिग्री की धूप में निकल रहे हैं, जिससे थर्मल शॉक लग रहा है। वहीं, खान शाकिर अली अस्पताल के डॉ. प्रितेश सिंह ठाकुर का कहना है कि पेट के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। दूषित पानी और बाहर के अनहाइजीनिक खाने से टाइफाइड और गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मरीज बढ़े हैं।
एम्स प्रबंधन ने किए विशेष इंतजाम
बढ़ती भीड़ को देखते हुए एम्स प्रबंधन ने मोर्चा संभाल लिया है। ओपीडी में मौसमी बीमारियों के चलते मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। इसे देखते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था की जा रही है।
कतारों में खड़े मरीजों को धूप से बचाने के लिए परिसर में अलग से शेड भी बनवाए जा रहे हैं। एम्स भोपाल के पीआरओ डॉ. केतन मेहर ने बताया कि हमारा प्रयास है कि भीषण गर्मी में किसी भी मरीज या परिजन को असुविधा न हो।
बचाव के लिए डॉक्टरों के महत्वपूर्ण सुझाव
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि तेज धूप से सीधे एसी वाले कमरे में न जाएं और न ही एसी से निकलकर तुरंत धूप में निकलें। दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं और ओआरएस, नींबू पानी या छाछ का सेवन करें। हमेशा ताजा बना भोजन ही खाएं, क्योंकि गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है।
सड़क किनारे बिकने वाले खुले जूस या कटे हुए फलों से बचें, क्योंकि ये टाइफाइड और हेपेटाइटिस का मुख्य कारण हैं। धूप में निकलने से पहले सिर को ढकें और हल्के सूती कपड़े पहनें। बुखार या सिरदर्द होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न लें, यह घातक हो सकता है।




