भोपाल लूट-झपटमारी की लगातार वारदातों से सहम गया है। शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक है पुलिस का र …और पढ़ें
HighLights
- पुलिस ने वारदातों के चार दिन बाद दर्ज किए केस
- डीसीपी ने थाना प्रभारी से मांगा स्पष्टीकरण
- फरियादी पांच दिन तक थाने के चक्कर काटता रहा
भोपाल। लूट-झपटमारी की लगातार वारदातों से राजधानी सहम गई है। बीते कुछ दिनों में हुई जानलेवा लूट के बाद शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक है पुलिस का रवैया, जो अपराध रोकने और आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें दबाने में जुटी नजर आ रही है।
एमपी नगर थाना क्षेत्र में सामने आए दो ताजा मामलों ने पुलिस की इस बेपरवाह कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है। यहां झपटमारी जैसी गंभीर वारदातों को ‘गुम’ की श्रेणी में डालकर दबाने की कोशिश की गई और जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, तब मजबूरी में एफआईआर दर्ज की गई।
फरियादी ने पहले मोबाइल ढूंढा, फिर फुटेज, पुलिस को दिखाए फिर भी एफआईआर नहीं
जहांगीराबाद निवासी 36 वर्षीय आशीष रंजन पेशे से कान्ट्रेक्टर हैं और एमपीनगर में उनका दफ्तर है। आठ अप्रैल की रात जोन-1 स्थित आइडीएफसी बैंक के सामने वह टहल रहे थे। तभी बाइक सवार दो बदमाश उनका मोबाइल फोन झपटकर फरार हो गए। पीड़ित जब थाने पहुंचे तो पुलिस ने कहा कि गुम हुआ होगा और उनसे संचार साथी पोर्टल के लिए फॉर्म भरवा दिया और सड़क पर मोबाइल ढूंढने की नसीहत दी।
निराश पीड़ित अगले दिन फिर थाने पहुंचे, जहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित ने खुद घटनास्थल के आसपास दुकानों के सीसीटीवी खंगाले तो उसमें मोबाइल झपटते हुए बाइक सवार बदमाश दिखे, जिसके बाद वह फुटेज लेकर पुलिस के पास तीसरी बार गए।
लेकिन हैरानी की बात है कि पुलिस ने आंखों के सामने सबूत दिखने के बाद भी केस दर्ज नहीं किया। कांट्रेक्टर ने किसी परिचित के माध्यम से जब एसीपी मनीष भारद्वाज और डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने तुरंत थाना पुलिस को केस दर्ज करने के निर्देश दिए, जिसके बाद आखिरकार एफआईआर हुई।
पांच दिन तक थाने के चक्कर काटे, तब सुनवाई
उससे पहले छह अप्रैल टीटी नगर निवासी 31 वर्षीय आरिफ खान से स्कूटी सवार बदमाशों ने उनका फोन झपट लिया था। पीड़ित ने अगले ही दिन थाने पहुंचकर शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज करना तो दूर, उसे गंभीरता से लेना भी उचित नहीं समझा और उसे मोबाइल गुम होने का प्रकरण बताकर संचार साथी पार्टल पर जानकारी दर्ज करवा दी। फरियादी पांच दिन तक थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन हर बार उसे टाल दिया गया। अंततः 11 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई।
फरियादियों की शिकायत पर तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही को लेकर थाना प्रभारी को स्पष्टीकरण का नोटिस भेजा है। लापरवाही मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। विवेक सिंह, डीसीपी जोन-2.




