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भोपाल के जेपी अस्पताल में अब और बेहतर होगा हड्डी का इलाज, मरीजों को मिलेंगे आधुनिक ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट

 

भोपाल के जेपी अस्पताल में अब ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट की उपलब्धता को बेहद मजबूत किया जा रहा है, जिसके लिए 15 लाख रुपये का विशेष बजट प्रावधान किया गया है। …और पढ़ें

भोपाल के जेपी अस्पताल में अब और बेहतर होगा हड्डी का इलाज, मरीजों को मिलेंगे आधुनिक ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट

भोपाल के जेपी अस्पताल में अब और बेहतर होगा हड्डी का इलाज

HighLights

  1. जेपी अस्पताल में अब और बेहतर होगा हड्डी का इलाज
  2. मरीजों को ऑपरेशन के लिए नहीं जाना पड़ेगा निजी अस्पताल
  3. 15 लाख के बजट से दूर होगी उपकरणों की कमी

भोपाल। जेपी अस्पताल में अब आर्थोपेडिक इम्प्लांट की उपलब्धता को बेहद मजबूत किया जा रहा है, जिसके लिए 15 लाख रुपये का विशेष बजट प्रावधान किया गया है। अस्पताल में इन आधुनिक इम्प्लांट्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होने से दुर्घटना (एक्सीडेंट) या गंभीर चोट के कारण होने वाले फ्रैक्चर के ऑपरेशनों के लिए मरीजों को अब बाहर नहीं भटकना पड़ेगा।

इम्प्लांट्स की लंबे समय से चल रही थी कमी

गौरतलब है कि जेपी अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में ऑपरेशनों के लिए जरूरी इम्प्लांट्स की लंबे समय से कमी चल रही थी। इस कमी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को उठानी पड़ती थी। सरकारी अस्पताल में इलाज होने के बावजूद मरीजों को मजबूरन बाहर की दुकानों या निजी अस्पतालों से महंगे दामों पर इम्प्लांट लगवाने पड़ रहे थे। कई बार पैसे की तंगी के कारण मरीजों के ऑपरेशन टल जाते थे।

 

मरीजों को मिलेगी बड़ी आर्थिक राहत

अब अस्पताल में ही सरकारी खर्च पर इम्प्लांट मिलने से मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें निजी अस्पतालों की मनमानी से मुक्ति मिलेगी।आने वाले दो सालों तक बनी रहेगी सुचारू व्यवस्थाअस्पताल प्रबंधन द्वारा बनाई गई इस नई व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं का यह अनुबंध आगामी दो वर्ष तक के लिए प्रभावी रहेगा।

इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दो सालों तक अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में आपरेशनों के लिए जरूरी इम्प्लांट्स की सप्लाई लगातार बनी रहेगी और मरीजों को किसी भी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मरीजों को इलाज के दौरान इन उपकरणों और इम्प्लांट्स से संबंधित सही परामर्श व सहायता मिल सके, इसके लिए अस्पताल के सिविल सर्जन और वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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