📰 विस्तृत समाचार
भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट का सियासी पारा अब राजधानी के गलियारों से निकलकर माननीय हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। बैंक धोखाधड़ी के 27 वर्ष पुराने मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता शून्य कर दी गई थी। अब उन्होंने इस सजा और अपनी सदस्यता समाप्त किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
27 साल
पुराना मामला
3 साल
की सजा
2737
वोटों से जीत (2023)
02 अप्रैल
सदस्यता रद्द हुई
🔴 हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें : राजेंद्र भारती की याचिका पर मंगलवार को अहम सुनवाई होनी है। यदि हाईकोर्ट उनकी सजा पर रोक (Stay) लगा देता है, तो उनकी विधायकी बहाल होने का रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन यदि तत्काल राहत नहीं मिली, तो निर्वाचन आयोग दतिया सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। बता दें कि भारती ने 2023 के चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
⚠️ समितियों से भी किया गया बेदखल — सदस्यता समाप्त होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने कड़ा रुख अपनाया है। 5 अप्रैल को राजेंद्र भारती को विधानसभा की प्राकल्लन समिति और सदस्य सुविधा समिति से भी बाहर कर दिया गया है। उनके स्थान पर अब नए सदस्यों का मनोनयन किया जाएगा।
🗳️ दतिया में फिर चुनावी बिसात : सजा के बाद सीट रिक्त घोषित होते ही दतिया में फिर से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को दतिया सीट के रिक्त होने की जानकारी दे दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि हाईकोर्ट से राजेंद्र भारती को ‘संजीवनी’ मिलती है या दतिया के मतदाताओं को एक बार फिर पोलिंग बूथ पर जाना पड़ेगा।
📌 निष्कर्ष
राजेंद्र भारती के लिए यह कानूनी लड़ाई उनके राजनीतिक करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी। राहत मिलने की स्थिति में कांग्रेस को बड़ी बढ़त मिलेगी, लेकिन उपचुनाव होने पर दतिया की जंग फिर से मध्य प्रदेश की सबसे हॉट सीट बन जाएगी।