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एमपी के 70 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से होंगे बाहर, भोपाल-इंदौर समेत बड़े शहरों के अस्पताल शामिल, 31 मार्च है आखिरी तारीख

 

प्रदेश के लगभग 70 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से बाहर होंगे। कारण यह कि इनके पास नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार हास्पिटल्स (एनएबीएच) का शुरुआती यानी …और पढ़ें

HighLights

  1. बिना NABH सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा आयुष्मान का लाभ
  2. MP के महानगरों के 70 अस्पतालों की संबद्धता समाप्त
  3. 10% अतिरिक्त पैकेज का लालच भी नहीं आया काम

भोपाल। प्रदेश के लगभग 70 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से बाहर होंगे। कारण यह कि इनके पास नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फार हास्पिटल्स (एनएबीएच) का शुरुआती यानी इंट्री लेवल प्रमाण पत्र नहीं है। ये सभी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे महानगरों के अस्पताल हैं। 31 मार्च के बाद इनकी संबद्धता समाप्त कर दी जाएगी।

छोटे जिलों में अस्पतालों की संख्या कम होने के कारण अभी उनके लिए यह बाध्यकारी नहीं किया गया है। इन अस्पतालों को कई बार अवसर दिया गया, पर मापदंड पूरा नहीं करने के कारण इंट्री लेवल प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर पाए। कुछ ने तो आवेदन ही नहीं किया।

 

कठिन शर्तों के कारण पीछे हट रहे अस्पताल संचालक

बता दें, प्रदेश में 720 निजी और 1118 सरकारी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना में संबद्ध हैं। प्रदेश में योजना का संचालन करने वाली स्टेट हेल्थ एजेंसी ने अस्पतालों के सामने यह भी शर्त रखी है कि जिनके पास इंट्री लेवल प्रमाण पत्र है, उन्हें भी दो वर्ष में फाइनल एनएबीएच प्राप्त करना होगा जिसकी शर्त कठिन है। ऐसे में कुछ अस्पताल संचालक इस कारण भी डर रहे हैं कि वे फाइनल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

एनएबीएच अनिवार्य करने की एजेंसी की शर्त के विरुद्ध अस्पताल संचालकों ने हाई कोर्ट में भी याचिका लगाई थी। जिस पर कोर्ट ने एजेंसी के निर्णय पर हस्तक्षेप नहीं करते कहा था कि अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने के लिए यह जरूरी है। फाइनल एनएबीएच अस्पतालों को पैकेज में 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिलती है, इसके बाद भी वे रुचि नहीं ले रहे हैं।

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एनएबीएच के लाभ

एनएबीएच के लाभ अस्पतालों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया की तरफ से यह प्रमाण पत्र दिया जाता है। इसके इंट्री, प्रोग्रेसिव और फाइनल तीन चरण होते हैं। विभिन्न मानकों पर टीम की मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार प्रमाण पत्र दिया जाता है।

इसमें संक्रमण रोकथाम, बायोमेडिकल वेस्ट का निपटान, रोगियों और उनके सहयोगियों के बैठने की सुविधा, आपरेशन थियेटर के लिए बने मानकों का पालन, स्टाफ का प्रशिक्षण, रिकार्ड संधारण, स्टाफ की उपलब्धता आदि का मूल्यांकन किया जाता है।

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