मध्य प्रदेश में हाल ही में सक्रिय हुए लॉरेंस बिश्नोई और उसके करीबी हैरी बाक्सर गिरोह की कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस को अहम जानकारी मिली है। …और पढ़ें

बिश्नोई गैंग ने तलाशा ‘शिकार’ पहचानने का नया तरीका (सांकेतिक तस्वीर)
भोपाल। मध्य प्रदेश में हाल ही में सक्रिय हुए लॉरेंस बिश्नोई और उसके करीबी हैरी बाक्सर गिरोह की कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस को अहम जानकारी मिली है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अब पुराने तरीकों को छोड़कर सरकारी पोर्टलों के जरिये अमीर लोगों को चिह्नित कर उन्हें ‘शिकार’ बना रहा है।
पुलिस गिरफ्त में आए तीन आरोपितों ने बताया है कि गिरोह के सदस्य जीएसटी और रेरा (रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी) जैसे सरकारी पोर्टलों से धनाढ्य लोगों की जानकारी निकाल रहे हैं।
ये पोर्टल किसी भी व्यवसायी के टर्नओवर, कंपनी के प्रमोटरों के नाम, घर का पता और उनके प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी देते हैं। इस डाटा के माध्यम से गिरोह संचालित कर रहे हैरी बाक्सर (जो विदेश से सक्रिय बताया जा रहा है) और अजमेर की जेल में बंद रितिक बाक्सर कारोबारियों को चिह्नित करते हैं। फिर उनसे फोन पर करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगी जाती है।
जब अपराधी कारोबारी के परिवार या स्टाफ की निजी जानकारी साझा करता है, तो वह डर जाता है। बता दें, इस गिरोह की रंगदारी को लेकर मध्य प्रदेश में एक महीने में पांच जिलों में छह एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस दौरान इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, अशोकनगर और खरगोन में रंगदारी मांगने के बड़े मामले सामने आए हैं। गुरुवार को इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है।
इंटरनेट मीडिया और किशोरों का इस्तेमाल
जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गिरोह विशेष रूप से राजस्थान के 15 से 19 वर्ष के किशोरों को भर्ती कर रहा है। इंटरनेट मीडिया पर गैंगस्टर्स की आकर्षक लाइफस्टाइल देखकर ये युवा अपराध की दुनिया की ओर आकर्षित होते हैं। अशोकनगर में पकड़ा गया 19 वर्षीय मनीष जांगिड़ इसका उदाहरण है।
पुलिस ने अब तक तीन गुर्गों दिनेश सुथार, पवन शर्मा और मनीष जांगिड़ को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इंटरनेट मीडिया के जरिये हो रही बातचीत और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। – राजीव मिश्रा, एसपी, अशोकनगर।




