गेहूं खरीदी में आई कमी के कारणों की पहचान कर सभी जिलों में जांच होगी। वास्तविक आर्थिक नुकसान की वसूली संबंधित उपार्जन समितियों, स्व-सहायता समूहों और प…और पढ़ें

फाइल फाेटो।
HighLights
- खरीदी के दौरान सामने आई कमी के कारणों की पहचान कर सभी जिलों में जांच कराई जाएगी
- वास्तविक आर्थिक नुकसान की वसूली संबंधित उपार्जन समितियों और परिवहनकर्ताओं से होगी
- पिछले वर्षों में प्रति क्विंटल औसतन 176 ग्राम कमी थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 70 ग्राम प्रति क्विंटल रह गई
भोपाल । प्रदेश में खरीदे गए गेहूं में कमी की बात सामने आने पर अब इसकी जिलेवार जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इस कमी के कारणों की पहचान कर संबंधित समितियों एवं परिवहनकर्ताओं से उसकी भरपाई कराई जाएगी।
अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
गेहूं की खरीदी में 70 ग्राम प्रति क्विंटल की कमी
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी में तुलाई, परिवहन, भंडारण आदि के हैंडलिंग कार्य में उपार्जित किए गए गेहूं की मात्रा में प्रति क्विंटल कुछ कमी आना एक सामान्य प्रक्रिया है। पिछले वर्षों में प्रति क्विंटल औसतन 176 ग्राम कमी देखने में आती थी।
जबकि, इस वर्ष गेहूं की खरीदी में 70 ग्राम प्रति क्विंटल की कमी देखने में आई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है।
जिम्मेदारों से की जाएगी वसूली
प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय उपार्जन समिति द्वारा कमी की पहचान एवं सत्यापन की कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद वास्तविक कमी से संभावित आर्थिक क्षति की वसूली सहकारी समितियों एवं स्व-सहायता समूहों तथा परिवहनकर्ताओं से की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार खरीदी सहकारी समितियों और स्व-सहायता समूहों द्वारा की जाती है। खरीद में कमी की प्रतिपूर्ति जिला स्तरीय उपार्जन समिति द्वारा संबंधित समितियों और परिवहनकर्ताओं से वसूली कर की जाती है।




