भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के एमबीबीएस इंटर्न और भावी इंटर्न डॉक्टरों ने प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को फिलहाल एक दिन के लिए स्थगित कर दिया है। हालांकि, इंटर्न्स ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन, कार्य बहिष्कार और अन्य सभी विरोध कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेंगे।
एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, 27 जुलाई से डॉ. कृष्णा और डॉ. संकेत गांधी मेडिकल कॉलेज में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने वाले थे। इसी बीच चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त धनराजू ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों से संपर्क कर आश्वस्त किया कि मंगलवार को उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें स्टाइपेंड वृद्धि सहित उनकी मांगों पर गंभीरता से चर्चा होगी।
आयुक्त के इस आश्वासन का सम्मान करते हुए इंटर्न्स ने भूख हड़ताल को मंगलवार तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है, ताकि बातचीत के जरिए समाधान का अवसर मिल सके।
इंटर्न्स ने कहा कि भूख हड़ताल भले ही फिलहाल स्थगित की गई हो, लेकिन 9 जुलाई 2026 से चल रहा आंदोलन और कार्यस्थगन पूर्ववत जारी रहेगा। उनका कहना है कि नियमित कार्य तभी शुरू किया जाएगा, जब उनकी मांगों पर सक्षम स्तर से लिखित आश्वासन प्राप्त होगा।
आंदोलनकारी डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि मंगलवार को होने वाली बैठक सकारात्मक रहेगी और लंबे समय से लंबित स्टाइपेंड वृद्धि सहित उनकी न्यायोचित मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
हमीदिया में खुद स्ट्रेचर खींच रहे परिजन
एमबीबीएस इंटर्न्स के कार्य बहिष्कार और आंदोलन के चलते भोपाल के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। वार्डों और ओपीडी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इंटर्न डाक्टरों के न होने से दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में कर्मचारियों की कमी के कारण बेबस परिजन खुद ही मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर लेकर एक से दूसरे वार्ड तक दौड़ते नजर आए।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
इधर, इस आंदोलन को अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन-जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (आईएमए जेडीएन) मध्य प्रदेश का भी पूर्ण समर्थन मिल गया है।
आईएमए जेडीएन के प्रदेश महासचिव डॉ. कुलदीप गुप्ता ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री को पत्र प्रेषित कर स्टाइपेंड वर्तमान 14,337 रुपये से बढ़ाकर सीधे 30,000 रुपये प्रतिमाह करने की अपील की है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों की ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी देते हैं। वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें दिया जा रहा स्टाइपेंड महंगाई और जीवन-यापन की लागत की तुलना में बेहद कम है।
देश के अन्य राज्यों के मुकाबले मप्र में इंटर्न्स का स्टाइपेंड काफी कम है, जिससे युवा चिकित्सकों में भारी निराशा है।




