भोपाल। केंद्र सरकार ने शहरों के बुनियादी ढांचे के कायाकल्प की एक और योजना पर काम शुरू किया है। अर्बन चैलेंज फंड के तहत केंद्र सरकार देशभर के शहरों में अगले छह साल तक एक लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह मिशन वर्ष 2031 तक चलेगा। केंद्र ने राज्य सरकार और नगरीय निकायों से विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जल्द प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि उनके लिए राशि जारी की जा सके। इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी में स्वीकृति दी थी।
इस योजना के तहत सड़क, सीवरेज, जलापूर्ति, सार्वजनिक परिवहन, डिजिटल गवर्नेंस और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाना है। योजना की खास बात यह है कि इसमें केंद्र सरकार की सहायता के साथ-साथ बाजार आधारित फंडिंग को भी अनिवार्य किया गया है। नगरीय निकायों को परियोजना की कुल लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा ऋण, बांड या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से जुटाना होगा।
दावा है कि इससे वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। इस योजना के तहत शहर को ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने के साथ पुराने शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास और जल एवं स्वच्छता पर काम करना होगा। प्रस्तावों की स्वीकृति के लिए 14 अनिवार्य शर्तें रखी गई हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित मध्य प्रदेश के कई शहरों ने इस फंड के लिए परियोजना के चयन पर काम शुरू कर दिया है।
तीन श्रेणियों में बांटा फंड
एक लाख करोड़ रुपये के इस फंड में से 90 हजार करोड़ प्रोजेक्ट फंड के रूप में सीधे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर खर्च होंगे। पांच हजार करोड़ रुपये प्रोजेक्ट प्रिपरेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग फंड के तहत परियोजनाओं की तैयारी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता पर खर्च किए जाएंगे। वहीं पांच हजार करोड़ क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी के लिए रखे गए हैं, जिससे छोटे और कमजोर नगरीय निकायों को ऋण लेने में मदद मिलेगी।
पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल
परियोजना के लिए सभी शहरी स्थानीय निकाय पात्र होंगे। इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है, इनमें 10 लाख से अधिक आबादी वाले बड़े शहर, राज्यों की राजधानियां, औद्योगिक शहर और छोटे या विशेष श्रेणी के निकाय शामिल हैं। छोटे या विशेष श्रेणी के निकायों में पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं।
अर्बन चैलेंज फंड परियोजना भारत सरकार ने शुरू की है। इसके लिए प्रदेश के सभी निकायों से प्रस्ताव मंगाए गए हैं। प्रस्ताव आते ही उन्हें केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा। -संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग।
तीन चरणों में जारी होगी राशि
परियोजना स्वीकृति के बाद 30 प्रतिशत राशि, 40 प्रतिशत काम पूरा होने पर 50 प्रतिशत राशि और 75 प्रतिशत कार्य प्रगति पर शेष 20 प्रतिशत राशि जारी की जाएगी। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं परियोजनाओं को मंजूर किया जाएगा जो शहर के समग्र विकास, आर्थिक मजबूती और पर्यावरणीय स्थिरता पर सकारात्मक प्रभाव डालें। इसके लिए राज्यों को अपने प्रस्तावों में स्पष्ट विजन, वित्तीय माडल और क्रियान्वयन क्षमता दर्शानी होगी।




