भोपाल: प्रदेश की तीन बिजली वितरण कंपनियों को हो रहे ₹6,043 करोड़ के घाटे को पाटने के लिए पावर मैनेजमेंट कंपनी ने दरें बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली है। हालांकि कंपनियों ने 10.19% की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, लेकिन राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा जनसुनवाई के बाद इसे 4% से 5% के बीच सीमित रखे जाने की संभावना है।
प्रमुख बिंदु (HighLights):
-
प्रभावी तिथि: नई दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू होंगी।
-
उपभोक्ता दायरा: प्रदेश के करीब 1.29 करोड़ घरेलू उपभोक्ता सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
-
स्मार्ट मीटर का भार: मीटर लगाने में खर्च होने वाले ₹820 करोड़ का बोझ भी जनता पर डाला जा रहा है।
-
फिक्स्ड चार्ज में वृद्धि: नियत प्रभार (Fixed Charge) को ₹28 से बढ़ाकर ₹31 (प्रति 15 यूनिट) करने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित नई दरें: एक नजर में (Unit Slab wise)
कंपनियों ने ऊर्जा प्रभार में औसत 51 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। नीचे दिए गए टेबल से समझें कि आपके स्लैब पर क्या असर पड़ सकता है:
| यूनिट स्लैब | वर्तमान दर (पैसे में) | प्रस्तावित दर (पैसे में) | अंतर (पैसे में) |
| 0 से 50 यूनिट तक | 445 | 478 | + 33 |
| 51 से 150 यूनिट तक | 541 | 582 | + 41 |
| 151 से 300 यूनिट तक | 679 | 730 | + 51 |
| 300 यूनिट से अधिक | 698 | 730 | + 32 |
क्यों बढ़ रही है बिजली? (The Financial Gap)
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिजली कंपनियों को सुचारू संचालन के लिए वर्ष 2026-27 में ₹65,374 करोड़ के राजस्व की आवश्यकता है। वर्तमान दरों से केवल ₹59,330 करोड़ मिलने का अनुमान है। इस ₹6,043 करोड़ के अंतर को भरने के लिए जनता पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।
विरोधाभास और चुनौतियां:
-
सस्ती सौर ऊर्जा: प्रदेश में सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता बढ़कर 5,781 मेगावाट हो गई है और यह ₹3 प्रति यूनिट से भी कम पर उपलब्ध है, फिर भी उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलता नहीं दिख रहा।
-
टैक्स में कटौती: केंद्र सरकार ने कोयले पर लगने वाले ₹400 के जीएसटी को खत्म कर दिया है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत कम होनी चाहिए थी।
-
स्मार्ट मीटर का वादा: पूर्व में कहा गया था कि स्मार्ट मीटर का बोझ जनता पर नहीं आएगा, लेकिन बजट प्रस्तावों में इसे शामिल किया गया है।
बीते वर्षों में बिजली दरों का सफर (Historical Hike)
पिछले कुछ सालों में बिजली दरों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है:
| वित्तीय वर्ष | वृद्धि (प्रतिशत में) |
| 2023-24 | 1.65% |
| 2024-25 | 0.07% |
| 2025-26 | 3.46% |
| 2026-27 (अनुमानित) | 4% – 5% |
निष्कर्ष: आम आदमी के बजट पर असर
गर्मियों की शुरुआत के साथ ही बिजली बिलों में यह बढ़ोतरी मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट को बिगाड़ सकती है। नियामक आयोग के अंतिम फैसले के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी, लेकिन यह तय है कि इस बार ‘अप्रैल फूल’ बिजली के झटके के साथ आने वाला है।




