भोपाल: मध्य प्रदेश के चार जिलों में निवेश के नाम पर मासूम लोगों को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस संगठित अपराध में अब तक 820 लोगों से 42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की पुष्टि हो चुकी है। मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा ने पूरी जांच पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा को सौंपने के आदेश दिए हैं।
चार जिलों में फैली ठगी की जड़ें
अब तक इस मामले में प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में कुल 11 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं:
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टीकमगढ़
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विदिशा
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अशोकनगर
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दमोह
पुलिस का अनुमान है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, पीड़ितों की संख्या और ठगी गई राशि का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
जांच सीआईडी को क्यों सौंपी गई?
अभी तक इस मामले की जांच अलग-अलग जिलों की पुलिस स्थानीय स्तर पर कर रही थी। हालांकि, इसमें कुछ चुनौतियां आ रही थीं:
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समन्वय की कमी: अलग-अलग जिलों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और तालमेल पर्याप्त नहीं था।
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संगठित अपराध का संदेह: पुलिस को अंदेशा है कि इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय या संगठित गिरोह काम कर रहा है।
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विस्तृत विवेचना: सीआईडी की टीम अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालकर मुख्य सरगनाओं तक पहुँचने की कोशिश करेगी।
जबलपुर और भोपाल की टीमें करेंगी जांच
DGP के आदेशानुसार, सीआईडी के जबलपुर एवं भोपाल के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम गठित की गई है। यह टीम सभी दर्ज अपराधों की पूरक विवेचना (Supplementary Investigation) करेगी। पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक (IG), सीआईडी के सीधे पर्यवेक्षण में संपन्न होगी।
प्रमुख बिंदु (HighLights)
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पीड़ितों की संख्या: 820+ लोग
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कुल ठगी: ₹42 करोड़ से अधिक
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दर्ज मामले: 4 जिलों में 11 एफआईआर
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नई जांच एजेंसी: सीआईडी (CID) मुख्यालय, भोपाल
चेतावनी: प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक मुनाफे के लालच में किसी भी अनधिकृत या संदिग्ध स्कीम में निवेश करने से बचें।




