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‘मुख्य सचिव किसी विभाग के सचिव नहीं, उनका नाम सभी केस से हटवाएं’, GAD ने सख्त निर्देश के साथ जारी की गाइडलाइन

 

सामान्य प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि विभाग के सचिव और कलेक्टर को यह देखना चाहिए कि जिन प्रकरण में राज्य शासन को मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार …और पढ़ें

'मुख्य सचिव किसी विभाग के सचिव नहीं, उनका नाम सभी केस से हटवाएं', GAD ने सख्त निर्देश के साथ जारी की गाइडलाइन

अदालतों में अब नहीं होगी मुख्य सचिव की बेवजह पेशी (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. अदालतों में अब नहीं होगी मुख्य सचिव की बेवजह पेशी
  2. इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने गाइडलाइन जारी की
  3. समय पर अपील न करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई का आदेश

भोपाल। विभागीय अधिकारियों के विलंब से जवाब दावा दाखिल करने या अधूरी जानकारी बिना दस्तावेज प्रस्तुत करने से न्यायालय द्वारा मुख्य सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए जाते हैं। मुख्य सचिव किसी विभाग के भारसाधक सचिव नहीं होते हैं। ऐसे में विभाग के सचिव और कलेक्टर को यह देखना चाहिए कि जिन प्रकरण में राज्य शासन को मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाकर अपील की गई है, उसमें मुख्य सचिव का नाम हटवाएं।

इसी तरह सामान्य प्रशासन या वित्त विभाग के परिपत्र को आधार नहीं बनाया गया है, वहां भी नाम हटवाने की प्रक्रिया की जाए। सेवा से जुड़े ऐसे मामले, जो व्यक्तिगत या सेवानिवृत्ति से जुड़े हैं और उनका प्रभाव सीमित है, वहां अनावश्यक अपील नहीं की जानी चाहिए। यह निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग ने न्यायालयीन प्रकरणों से जुड़े मामलों के निराकरण को लेकर सभी विभागों को दिए हैं।

 

समय पर अपील न करने वाले अधिकारी पर हो कार्रवाई

विभाग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश के अनुसार सबसे पहले विभाग न्यायालयीन प्रकरण के लिए सबसे पहले प्रभारी अधिकारी नियुक्त करें। यदि एक से अधिक विभागों से जुड़ा मामला हो तो मुख्य विभाग संबंधित विभागों से जानकारी लेकर जवाबदावे में सम्मिलित करे। प्रभारी अधिकारी समन्वय स्थापित कर जवाबदावा समयसीमा में दायर करें। मुख्य विभाग यह परीक्षण करें कि न्यायालय में किसी अनावश्यक कार्यालय या अधिकारी को पक्षकार तो नहीं बनाया है।

यदि संबंधित अधिकारी का उससे कोई लेना-देना नहीं है तो उसका नाम हटाने के लिए आवेदन समय से प्रस्तुत किया जाए। कई मामलों में सामान्य प्रशासन या वित्त विभाग को पार्टी बनाया जाता है, जबकि नीति से जुड़ा विषय नहीं होता है। ऐसे मामलों में नाम हटवाया जाए। जिन प्रकरणों में आदेश पारित हो चुके हैं, उनके पालन की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सचिव, विभागाध्यक्ष, कार्यालय प्रमुख द्वारा समीक्षा की व्यवस्था की जाए। यदि आदेश के पालन में कठिनाई हो तो अपील समय की जाए ताकि अवमानना की स्थिति न बने।

अपील दायर करने से पहले लें अभिमत

अपील दायर करने से पहले अभिमत लिया जाए। यदि समान प्रकृति के मामले में पहले अभिमत लिया जा चुका है तो उसका उल्लेख करते हुए आगे की कार्रवाई करें ताकि विलंब ना हो। यदि विलंब के कारण शासन के विरुद्ध आदेश पारित होता है तो संबंधित विभाग प्रकरण से संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई करें और शासन को हुई वित्तीय हानि की वसूली की जाए।

विभाग द्वारा यह भी निर्देश दिए गए हैं कि अपील दायर करने से पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि जो निर्णय हुआ है, उसका प्रभाव क्या है। यदि पूर्व उदाहरण स्थापित न होता हो और प्रकरण व्यक्तिगत व्यथा, पेंशन या सेवानिवृत्ति से संबंधित हो तो परीक्षण करके 15 दिन में अभिमत दिया जाए।

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