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नौकरी छूटी तो टूट गई जीने की आस; भोपाल में 4 महीने से बेरोजगार युवक ने शराब में मिलाकर पिया जहर, बिलखते छोड़ गया पत्नी और 2 मासूम बच्चे

 

भोपाल। कहते हैं बेरोजगारी सिर्फ जेब को खाली नहीं करती, बल्कि इंसान की जीने की इच्छा और उसके हौसले को भी धीरे-धीरे दीमक की तरह चाट जाती है। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला राजधानी भोपाल के नीलबड़ इलाके से सामने आया है।

यहां पूजा कॉलोनी में रहने वाले एक 40 वर्षीय युवक ने नई नौकरी न मिलने के गहरे तनाव में आकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। उसने शराब में जहर मिलाकर पी लिया, जिसके बाद हमीदिया अस्पताल में चले लंबे इलाज के बाद उसने दम तोड़ दिया। वह अपने पीछे बिलखती हुई पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गया है, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।

 

नौकरी के लिए 4 महीने से भटक रहा था

पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक सौरभ बंजारे (40) एक निजी कंपनी में नौकरी करता था। उसके पिता एक सरकारी डॉक्टर थे, जो हाल ही में सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन करीब चार महीने पहले अचानक सौरभ की नौकरी छूट गई। नौकरी जाने के बाद सौरभ ने हिम्मत नहीं हारी।

वह पिछले चार महीनों से लगातार सुबह से शाम तक नई नौकरी के लिए भटक रहा था, इंटरव्यू दे रहा था। हर जगह से निराशा हाथ लगने के कारण वह धीरे-धीरे गहरे मानसिक अवसाद में चला गया। वह घर में अक्सर गुमसुम और परेशान रहने लगा था।

10 जून को दोपहर के खाने के बाद बिगड़ी तबीयत

जांच अधिकारी एसआई केके द्विवेदी ने बताया कि यह खौफनाक कदम सौरभ ने 10 जून को उठाया था। रोज की तरह उस दिन भी वह दोपहर में घर पर भोजन करने बैठा। खाना खाने के कुछ ही देर बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

सौरभ भागकर घर की सीढ़ियों पर गया और उल्टियां करने लगा। उल्टियों से आ रही रासायनिक बदबू को सूंघकर परिजन सहम गए और उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर भागे, जहां से उसे हमीदिया अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में तड़पते हुए सौरभ ने खुद रोते हुए परिजनों को बताया कि उसने निराशा में आकर शराब में जहर मिलाकर पी लिया था।

हमीदिया में 11 दिनों तक मौत से जंग

जहर शरीर में पूरी तरह फैल चुका था, लेकिन डॉक्टरों की टीम सौरभ को बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही थी। सौरभ भी अपनी पत्नी और दोनों मासूम बच्चों के लिए जीना चाहता था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल में करीब 11 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच कड़ा संघर्ष करने के बाद, शनिवार दोपहर करीब 2 बजे सौरभ की सांसें थम गईं।

जैसे ही डॉक्टरों ने सौरभ को मृत घोषित किया, अस्पताल परिसर परिजनों की चीखों से गूंज उठा। एक हंसता-खेलता परिवार इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि नौकरी की एक अदद तलाश उनके घर के मुखिया को इस तरह छीन लेगी। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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