भोपाल। देशभर में अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इसका असर मध्य प्रदेश में भी साफ दिखाई दे रहा है, जहां आमतौर पर जून के मध्य तक पहुंचने वाला मानसून अभी तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में मानसून के आगमन के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है।
15 जून तक पहुंच जाता था मानसून, इस बार देरी
आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार 22 जून तक भी इसकी स्पष्ट एंट्री नहीं हो सकी है। देश में मानसून के प्रवेश को करीब 20 दिन बीत चुके हैं, इसके बावजूद मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इसकी गति कमजोर बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी प्रमुख वजह अल नीनो प्रभाव है, जिसने मानसूनी गतिविधियों को प्रभावित किया है।
केंद्र सरकार की स्थिति पर नजर
मध्य प्रदेश के 16 जिले सूखे के गंभीर खतरे की जद में हैं। बारिश में देरी का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर पड़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और राज्य सरकार के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
सरकार ने सार्वजनिक नहीं किए सभी जिलों के नाम
सूत्रों के मुताबिक, संभावित सूखे को लेकर घबराहट से बचने के लिए सरकार और मौसम विभाग ने प्रभावित जिलों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि, जिन जिलों पर सबसे अधिक खतरा बताया जा रहा है उनमें धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा, खंडवा और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
किसानों के लिए तैयार हो रहा कंटिजेंसी प्लान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मानसून में देरी और बारिश के लंबे अंतराल जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के साथ बैठकें कर किसानों को वैकल्पिक फसलों और कम पानी वाली खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यदि मानसून सामान्य नहीं रहता है तो किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ना होगा, जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है।”
मौसम विभाग: 29 जून के आसपास पहुंच सकता है मानसून
मौसम विज्ञान केंद्र, मध्य प्रदेश के निदेशक अजय कुमार सिंह के अनुसार, प्रदेश में मानसून के आगमन में अभी कुछ और समय लग सकता है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए 29 जून के आसपास मानसून सक्रिय होने की संभावना जताई गई है। उन्होंने कहा कि अल नीनो का प्रभाव केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर देश के कई हिस्सों में देखा जा रहा है। इस संबंध में मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों को भेज दी है।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा संकट
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। ऐसे में बारिश में देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ फसलों की बुआई का समय निकलता जा रहा है, जबकि पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं।किसान पहले भी कई चुनौतियों का सामना कर चुका है, लेकिन वर्तमान हालात बेहद चिंताजनक हैं। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।




