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एमपी लोकायुक्त में ‘घूसखोरी नेटवर्क’ का पर्दाफाश, लोकायुक्त डीजी ने प्रधान आरक्षक और वाहन चालक को तत्काल प्रभाव से किया बर्खास्त

 

लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम उठाते हुए लोकायुक्त संगठन में पदस्थ प्रधान आरक्षक यशवंत सिंह ठाकुर और …और पढ़ें

एमपी लोकायुक्त में 'घूसखोरी नेटवर्क' का पर्दाफाश, लोकायुक्त डीजी ने प्रधान आरक्षक और वाहन चालक को तत्काल प्रभाव से किया बर्खास्त

भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त के प्रधान आरक्षक और चालक बर्खास्त (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त के प्रधान आरक्षक और चालक बर्खास्त
  2. केस में हेरफेर करने के लिए सौदेबाजी करने के गंभीर आरोप लगे
  3. दोनों को आरोप पत्र सौंपते हुए सेवा से बर्खास्तगी के आदेश जारी

भोपाल। लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख ने शुक्रवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम उठाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। डीजी ने लोकायुक्त संगठन में पदस्थ प्रधान आरक्षक यशवंत सिंह ठाकुर और वाहन चालक अमित विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। दोनों कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर वॉयस और केस में हेरफेर करने के लिए सौदेबाजी करने के बेहद गंभीर आरोप हैं।

चालक ने रिश्वत के रूप में मांगे 8 लाख रुपये

मामले के खुलासे के अनुसार,चालक अमित विश्वकर्मा ने एक शिकायत में केस को रफा-दफा करने के लिए लोकायुक्त के डीएसपी बीएम द्विवेदी के नाम पर 5 लाख रुपये और मंजू सिंह के नाम पर 3 लाख रुपये की मांग की थी।

 

वहीं, दूसरी ओर प्रधान आरक्षक यशवंत ठाकुर ने आरोपित की मदद करने के लिए रिश्वत की मांग की थी। ठाकुर ने रिश्वतखोर को यहां तक सलाह दे डाली थी कि वॉइस टेस्ट की ट्रांस्क्रिप्ट में हेरफेर करने और आवाज बदलने के लिए उसे बुंदेलखंडी बोली में बात करने की प्रैक्टिस करनी पड़ेगी।

इन दोनों कर्मचारियों की इस करतूत और बातचीत का खुलासा होने के बाद लोकायुक्त महानिदेशक ने इसे सेवा शर्तों का घोर उल्लंघन और संगठन की छवि धूमिल करने वाला कृत्य माना। दोनों को विस्तृत आरोप पत्र सौंपते हुए सेवा से बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

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