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पौराणिक कथाओं के पन्नों में खोईं जेल में बंद पूर्व जज, महिला आयोग को नहीं मिले वीआईपी ट्रीटमेंट के संकेत

 

भोपाल सेंट्रल जेल में बंद पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह महिला आयोग के निरीक्षण के दौरान देवदत्त पटनायक का उपन्यास ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती हुई मिलीं। …और पढ़ें

Twisha Sharma Case: पौराणिक कथाओं के पन्नों में खोईं जेल में बंद पूर्व जज, महिला आयोग को नहीं मिले वीआईपी ट्रीटमेंट के संकेत

भोपाल सेंट्रल जेल में बंद पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह देवदत्त पटनायक का उपन्यास *’द प्रेग्नेंट किंग’* पढ़ रही हैं।

HighLights

  1. महिला आयोग के निरीक्षण में गिरिबाला सिंह *’द प्रेग्नेंट किंग’* पढ़ती मिलीं
  2. आयोग को किसी तरह के वीआईपी ट्रीटमेंट के संकेत नहीं मिले
  3. लीगल एड के वकीलों की पैरवी पर अदालत ने दिशा-निर्देश मांगे हैं

भोपाल। पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह इन दिनों भोपाल सेंट्रल जेल की चारदीवारी में पौराणिक आख्यानों के जरिए वक्त गुजार रही हैं। त्विषा शर्मा की संदेहास्पद मौत के मामले में न्यायिक हिरासत सेवानिवृत्त जज बुधवार को उस समय चर्चा में आ गईं,जब मध्य प्रदेश महिला आयोग की टीम जेल का निरीक्षण करने पहुंची।

बैरक में ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती मिलीं पूर्व जज

बैरक में जब आयोग की नजर पूर्व जज पर पड़ी, तो वे प्रख्यात लेखक देवदत्त पटनायक का चर्चित उपन्यास ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ने में तल्लीन थीं। हालांकि, अधिकारियों को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जब पूर्व जज से मुलाकात की, तो वे बेहद शांत नजर आईं।

 

इससे पहले उनका बेटा और मरहूम त्विषा का पति भी जेल में यही उपन्यास पढ़ते हुए पाया गया था।

नहीं मिल रहा वीआईपी ट्रीटमेंट

अक्सर हाई-प्रोफाइल कैदियों को लेकर उठने वाले ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ के सवालों पर इस निरीक्षण ने विराम लगा दिया। आयोग को जेल में उन्हें किसी भी तरह की विशेष सुविधा दिए जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला। भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामान्य व्यवस्थाओं को लेकर पूछे गए सवालों पर पूर्व जज ने पूरी तरह संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

उपन्यास ने खींचा ध्यान

गिरिबाला सिंह जिस उपन्यास को पढ़ रही थीं, वह महाभारत कालीन राजा युवनाश्व की पौराणिक कथा पर आधारित है। संतान की चाह में राजा अनजाने में मंत्र अभिमंत्रित जल पी लेते हैं और स्वयं गर्भवती हो जाते हैं, जिससे बाद में राजा मांधाता का जन्म होता है। जेल के इस एकांत में पूर्व जज का इस तरह की गंभीर और दार्शनिक पुस्तक का चुनाव करना हर किसी के बीच कौतूहल का विषय बना रहा।

कानूनी मोर्चे पर नया मोड़

इस बीच, मामले में एक नया विधिक पेंच सामने आया है। पूर्व जज की पैरवी के लिए चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल की रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने जिला अदालत में वकालतनामा पेश किया है।

चूंकि दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण (लीगल एड) से संबद्ध हैं, इसलिए अदालत ने ‘स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी’ से लिखित में दिशा-निर्देश मांगे हैं कि क्या शासकीय विधिक सेवा के वकीलों को इस हाई-प्रोफाइल मामले में पैरवी की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

निरीक्षण के दौरान आयोग के सचिव सुरेश तोमर और जेल अधीक्षक राकेश भांगरे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जहां महिला बंदियों ने ऑर्केस्ट्रा पर भजन भी प्रस्तुत किए।

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