डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण विवाद (MP OBC Reservation Row) का असर अब भी हजारों चयनित अभ्यर्थियों पर बना हुआ है। भर्ती परीक्षाओं में चयन के बावजूद बड़ी संख्या में उम्मीदवार नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं। 87:13 फॉर्मूले के चलते विभिन्न विभागों के करीब 10 हजार पद होल्ड हैं। लंबे समय से लंबित यह मामला अब जबलपुर हाईकोर्ट की विशेष बेंच में नियमित सुनवाई के दौर में पहुंच गया है, जिससे अभ्यर्थियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ी हैं।
शिक्षक से लेकर पुलिस भर्ती तक सबसे ज्यादा असर
आरक्षण विवाद का प्रभाव केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। स्कूल शिक्षक भर्ती (वर्ग-1, 2 और 3), पुलिस आरक्षक भर्ती, ग्रुप-4, ग्रुप-5 मेडिकल स्टाफ, वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी समेत कई भर्तियां प्रभावित हैं। कई चयनित उम्मीदवार वर्षों पहले चयनित हो चुके हैं, लेकिन नियुक्ति नहीं मिलने से उनका करियर अधर में लटका हुआ है।
कई अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी की उम्मीद में निजी नौकरी छोड़ दी, जबकि कई आर्थिक संकट के कारण अस्थायी रोजगार या मजदूरी करने को मजबूर हैं। वहीं कुछ उम्मीदवारों के लिए बढ़ती उम्र नई भर्ती परीक्षाओं में अवसर भी सीमित करती जा रही है।
ESB की भर्तियों में कितने पद होल्ड?
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 4,233 पद स्कूल शिक्षक भर्ती (वर्ग-1, 2 एवं 3) में होल्ड हैं। इसके अलावा पुलिस आरक्षक भर्ती के 1,990, ग्रुप-4 संयुक्त भर्ती के 1,180, ग्रुप-5 मेडिकल स्टाफ के 994, संयुक्त वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक एवं जेल प्रहरी भर्ती के 542 तथा अन्य भर्तियों के 1,028 पद लंबित हैं। कुल मिलाकर 9,967 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई सुनवाई
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को सभी संबंधित याचिकाएं जबलपुर हाईकोर्ट भेजते हुए 90 दिनों के भीतर विशेष बेंच बनाकर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने इसे छात्रों और सरकारी नौकरियों से जुड़ा संवेदनशील मामला बताते हुए अनावश्यक देरी पर चिंता जताई थी।
इसके बाद जून 2026 में मुख्य न्यायाधीश बदलने के बाद जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष बेंच गठित की गई। अदालत ने सभी 91 संबंधित फाइलों को एक साथ संकलित कर नियमित सुनवाई के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए।
| भर्ती | होल्ड पद |
|---|---|
| स्कूल शिक्षक भर्ती (वर्ग-1, 2 एवं 3) | 4,233 |
| पुलिस आरक्षक/कांस्टेबल भर्ती | 1,990 |
| ग्रुप-4 संयुक्त भर्ती | 1,180 |
| ग्रुप-5 मेडिकल स्टाफ (स्टाफ नर्स एवं ANM) | 994 |
| संयुक्त वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक एवं जेल प्रहरी | 542 |
| अन्य भर्तियां | 1,028 |
| कुल योग | 9,967 |
15 जुलाई से डे-टू-डे सुनवाई जारी
15 जुलाई 2026 से जबलपुर हाईकोर्ट की विशेष बेंच कोर्ट रूम नंबर-13 में नियमित (डे-टू-डे) सुनवाई कर रही है। अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों से स्पष्ट कहा है कि बिना उचित कारण स्थगन नहीं मांगा जाए और बहस केवल कानूनी एवं संवैधानिक पहलुओं तक सीमित रखी जाए।
मानसून सत्र में भी उठेगा मुद्दा
ओबीसी आरक्षण विवाद को लेकर अभ्यर्थी और विभिन्न संगठन भोपाल में एकत्र हो रहे हैं। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और सरकार से समाधान की मांग भी की जाएगी। ऐसे में हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर हजारों चयनित अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
- अगस्त 2024: एससी/एसटी उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर पर ऐतिहासिक फैसला।
- 19 फरवरी 2026: सभी याचिकाएं हाईकोर्ट भेजीं, 90 दिन में सुनवाई पूरी करने के निर्देश।
- जून 2026: जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष बेंच गठित।
- 15 जुलाई 2026: जबलपुर हाईकोर्ट में डे-टू-डे सुनवाई शुरू।
- कोर्ट का निर्देश: अनावश्यक स्थगन नहीं, केवल संवैधानिक और कानूनी मुद्दों पर बहस।




