एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
सिंहस्थ 2028 की तैयारी: मध्य प्रदेश सरकार की अनूठी पहल, अब नर्मदा घाटों के सौंदर्यीकरण और सफाई की जिम्मेदारी संभालेंगे विधायक
भोपाल: उज्जैन में होने जा रहे महाकुंभ ‘सिंहस्थ 2028’ के भव्य आयोजन को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के घाटों के कायाकल्प के लिए एक बेहद अनूठी और बड़ी रणनीति तैयार की है। पारंपरिक रूप से स्थानीय निकायों (नगर निगम और नगर पालिकाओं) पर रहने वाले इस जिम्में को अब और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सीधे क्षेत्रीय विधायकों को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
दीपावली के त्योहार के तुरंत बाद शुरू होने वाली इस योजना में सत्ताधारी दल (भाजपा) और विपक्षी दल (कांग्रेस)—दोनों दलों के विधायक अपनी-अपनी विधायक निधि (MLA Fund) का उपयोग करके अपने-अपने क्षेत्रों के नर्मदा घाटों को संवारेंगे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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‘विधायक आदर्श घाट योजना’ का खाका: सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को ‘विधायक आदर्श घाट योजना’ का नाम दिया गया है। यह योजना अनूपपुर (नर्मदा उद्गम अमरकंटक) से लेकर अलीराजपुर तक, नर्मदा नदी के संपूर्ण प्रवाह क्षेत्र में आने वाले 16 प्रमुख जिलों में लागू की जाएगी।
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राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर सहभागिता: नर्मदा किनारे स्थित घाटों में से लगभग 35 प्रतिशत क्षेत्र कांग्रेस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत आता है, जबकि सीहोर, देवास, नर्मदापुरम और खंडवा जैसे प्रमुख जिलों के प्रसिद्ध घाट भाजपा विधायकों के क्षेत्र में आते हैं। इस प्रकार, इस महाअभियान में सभी दलों के जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका निभाएंगे।
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संयुक्त प्रशासनिक भूमिका: इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए नर्मदा घाटी विकास विभाग (NVDA), नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मिलकर संयुक्त रूप से काम करेंगे।
कैसे विकसित किए जाएंगे ‘आदर्श घाट’?
इस योजना के तहत चिन्हित नर्मदा घाटों को आधुनिक यात्री सुविधाओं और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित होंगी:
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हरियाली और पार्क: घाटों के आसपास प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा और हरे-भरे पार्क विकसित किए जाएंगे।
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योग और ध्यान केंद्र: आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रत्येक मॉडल घाट पर योग और ध्यान (Meditation) के लिए विशेष केंद्र बनाए जाएंगे।
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पूर्ण प्लास्टिक प्रतिबंध: इन सभी धार्मिक स्थलों की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए आसपास के परिसरों में ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ (Single Use Plastic) के उपयोग पर पूरी तरह से पाबंदी लागू की जाएगी।




