एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एनजीटी का कड़ा रुख: मध्य प्रदेश के 13,565 वेटलैंड का होगा सीमांकन और मुनारबंदी, बड़े तालाब के सर्वे तक भदभदा डैम के गेट खोलने पर रोक
भोपाल: मध्य प्रदेश के तालाबों, झीलों और वेटलैंड पर बढ़ते अतिक्रमण और प्रदूषण को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि अब कागजी कार्रवाई के बजाय जमीन पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत प्रदेशभर के 13,565 चिह्नित वेटलैंड्स का छह महीने के भीतर जमीन पर सीमांकन कर मुनार लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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6 महीने में सीमांकन और मुनारबंदी: एनजीटी ने राज्य के सभी चिन्हित वेटलैंड्स का जमीन पर सीमांकन कर मुनार (पिलर) लगाने को कहा है। वेटलैंड के हाई फ्लड लेवल (HFL) या एफटीएल से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के नए निर्माण पर पूरी तरह रोक रहेगी और पहले से मौजूद अवैध निर्माणों पर 3 महीने में कार्रवाई करनी होगी।
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भदभदा डैम के गेट खोलने पर रोक: राशिद नूर खान और आर्या श्रीवास्तव की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने बड़े तालाब का नए सिरे से वैज्ञानिक सर्वे (ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, जियो-टैगिंग और ग्राउंड ट्रुथिंग के जरिए) 15 दिन में कराने के निर्देश दिए हैं। सीमांकन पूरा होने और पानी एफटीएल तक पहुंचने तक भदभदा डैम के गेट खोलने पर रोक लगा दी गई है।
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अधिकारियों की जवाबदेही तय: एनजीटी ने साफ किया है कि वेटलैंड क्षेत्र में अतिक्रमण, उद्योग, मलबा या ठोस कचरा डालना और बिना उपचारित सीवेज छोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कार्रवाई में कोताही बरतने या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञ समिति का गठन और अन्य कड़े निर्देश
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सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति: पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडेय की याचिका पर भोज वेटलैंड, केरवा और कलियासोत की FTL और FRL को अंतिम रूप देने के लिए एक सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है, जो 15 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। भदभदा के पास अपर लेक कैचमेंट में 227 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से कुछ हटाए जा चुके हैं और शेष पर कार्रवाई प्रक्रिया में है।
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नालों पर लगेंगे कैमरे और डिजिटल मीटर: नितिन सक्सेना की याचिका पर एनजीटी ने बड़ी और छोटी झील में सीवेज गिराने वाले हर नाले के आउटफॉल पर पीटीजेड कैमरे और डिजिटल फ्लो मीटर लगाने के निर्देश दिए हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह में रिपोर्ट देनी होगी कि कितना सीवेज ट्रीट हो रहा है और कितना सीधे झील में जा रहा है।
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2.25 हेक्टेयर से बड़े जलस्रोत वेटलैंड के दायरे में: एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि किसी जलस्रोत को सिर्फ ‘डैम’ या ‘रिजर्वायर’ कहकर वेटलैंड नियमों से बचाया नहीं जा सकता। 2.25 हेक्टेयर से बड़े सभी जल निकाय वेटलैंड के दायरे में आएंगे, जिनकी निगरानी जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समितियों द्वारा की जाएगी।




