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ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से भोपाल में गहरा सकता है ड्राई फ्रूट्स और मसालों का संकट

 

भोपाल। दिल्ली एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों के जाम से भोपाल में ड्राई फ्रूट मसाले और रेडीमेड कपड़े की कमी हो सकती है। फिलहाल माल की आवक बंद हो गई है। पुराना स्टॉक होने के कारण अभी बाजार में आंशिक असर ही हुआ है, लेकिन हड़ताल लंबी चली तो इसकी कमी हो सकती है भाव भी बढ़ सकते हैं।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के आह्वान पर दिल्ली के ट्रांसपोर्टर ने चक्काजाम किया है।

दिल्ली से माल की आवक हुई बंद

दिल्ली से आने वाले माल की आवक बंद हो गई है। भोपाल में दिल्ली से ड्राई फ्रूट, मसाले, किराने का कुछ सामान, हार्डवेयर, मशीनरी एवं रेडीमेड कपड़े आदि आते हैं। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव अनुपम अग्रवाल के अनुसार व्यापारियों के पास पुराना स्टाक होने के कारण अभी हड़ताल का असर नहीं हुआ है।

हड़ताल लंबी चली तो भाव बढ़ सकते हैं। और कुछ वैरायटी की कमी महसूस हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर में 23 मई तक ट्रांसपोर्टरों ने ट्रकों की आवाजाही बन्द की है। कई शहरों में माल सप्लाई प्रभावित है।

नए नियमों का हो रहा है विरोध

जानकारी के अनुसार ट्रांसपोर्ट यूनियनें पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क बढ़ाने, बीएस चार वाहनों पर प्रतिबंध का विरोध कर रही हैं। दिल्ली की सीमाओं पर बड़ी संख्या में ट्रक रोके जा रहे हैं, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई है। आजादपुर, गाजीपुर जैसी बड़ी मंडियों पर भी असर पड़ रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो मुश्किल हो सकती है। मध्य प्रदेश से दिल्ली जाने वाले ट्रक भी रुके हुए हैं। बताया जा रहा है कि ट्रांसपोर्टर की सरकार से बातचीत चल रही है।

क्यों हो रहा है आंदोलन? (ट्रांसपोर्ट संगठनों की मांगें)

ट्रांसपोर्ट संगठनों ने दिल्ली-एनसीआर में व्यावसायिक वाहनों पर लगातार बढ़ रही लागत और नियमों के विरोध में यह मोर्चा खोला है । इंदौर ट्रक ऑपरेटर्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (ITOTA) ने भी इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।

1. ग्रीन टैक्स की समाप्ति: दिल्ली में व्यावसायिक वाहनों पर लगाए गए ग्रीन टैक्स को तुरंत हटाया जाए ।

2. पुराने वाहनों को एंट्री: 15 साल पुराने वाहनों के प्रवेश पर लगी रोक को खत्म कर उन्हें एंट्री दी जाए ।

3. लागत में कमी: लगातार बढ़ती परिवहन लागत पर नियंत्रण किया जाए ।

सप्लाई चेन प्रभावित: रोजाना चलते हैं 30 से 40 हजार ट्रक

ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के अनुसार, सामान्य दिनों में दिल्ली और मध्य प्रदेश के बीच रोजाना 30 से 40 हजार ट्रकों की आवाजाही होती है । दिल्ली से रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान, रेडीमेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, मशीन पार्ट्स और थोक किराना बड़ी मात्रा में मध्य प्रदेश पहुंचता है ।

वहीं, मध्य प्रदेश से कृषि उत्पाद, इंडस्ट्रियल गुड्स और अन्य माल दिल्ली भेजा जाता है । तीन दिन तक परिवहन प्रभावित रहने से पूरी सप्लाई चेन चरमरा सकती है ।

थोक बाजारों और व्यापारियों की बढ़ी चिंता

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की दिल्ली पर निर्भरता बहुत ज्यादा है । यदि यह आंदोलन तीन दिन से आगे खिंचा, तो बाजार में रोजमर्रा के सामान की भारी किल्लत हो सकती है । इसका सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश के बड़े शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के थोक बाजारों पर पड़ेगा

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