पिछले पांच सालों से हाउसिंग बोर्ड ने आम जनता के लिए एक भी नया बजट-फ्रेंडली या किफायती प्रोजेक्ट लान्च नहीं किया है। शहर का एक बड़ा मध्यम और गरीब वर्ग …और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो एआई से तैयार की गई है।
HighLights
- पिछले 5 वर्षों में भोपाल में हाउसिंग बोर्ड ने कोई नया बजट-फ्रेंडली आवासीय प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं किया
- वर्तमान परियोजनाओं में मकानों की कीमतें ₹62 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक पहुंच चुकी हैं
- हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि मिक्स्ड हाउसिंग मॉडल पर काम किया जा रहा है
भोपाल। कभी निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने वाला मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड अब प्रीमियम हाउसिंग परियोजनाओं पर केंद्रित नजर आ रहा है।
पिछले पांच वर्षों में राजधानी भोपाल में बोर्ड ने आम नागरिकों के लिए कोई नया बजट-फ्रेंडली आवासीय प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं किया है। इससे कम और मध्यम आय वर्ग के परिवार निजी बिल्डरों और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे विकल्पों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
कभी किफायती आवास की पहचान था बोर्ड
एक समय था जब ऐशबाग, करोंद और 10 नंबर स्टॉप जैसी प्रमुख लोकेशनों पर हाउसिंग बोर्ड की आवासीय योजनाओं के लिए लंबी कतारें लगती थीं। गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सस्ती कीमतों के कारण बोर्ड आम लोगों की पहली पसंद माना जाता था।
10 लाख के घर से 1 करोड़ तक का सफर
जानकारी के अनुसार करीब 10 साल पहले बोर्ड ने कोलार क्षेत्र में गौरव नगर अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट लान्च किया था। तब आम नागरिकों को मात्र 10 लाख रुपये में किफायती आवास खरीदने का मौका मिला था। उसके बाद से बोर्ड ने बजट-फ्रेंडली घरों से जैसे किनारा ही कर लिया।
जनता का कहना है कि बोर्ड अब पूरी तरह एक प्राइवेट कॉलोनाइजर की तरह काम कर रहा है। हाल ही में लान्च किए गए कटारा हिल्स के सैफायर पार्क सिटी प्रोजेक्ट में मकानों की कीमत 62.65 लाख से 71.67 लाख रुपये तक है। वहीं अवधपुरी में जम्बूरी मैदान के सामने खजूरी हाउसिंग प्रोजेक्ट की कीमत 79.54 लाख से शुरू होकर 1.01 करोड़ रुपये तक पहुंच रही है।
वर्तमान में बोर्ड के प्रमुख प्रोजेक्ट्स की कीमतें आम परिवारों की पहुंच से बाहर हैं-
सैफायर पार्क सिटी, कटारा हिल्स : ₹62.65 लाख से ₹71.67 लाख
खजूरी हाउसिंग प्रोजेक्ट, अवधपुरी : ₹79.54 लाख से ₹1.01 करोड़
मिक्स्ड हाउसिंग मॉडल पर जोर
हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि अब संस्था अलग से ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) परियोजनाएं लाने के बजाय मिक्स्ड हाउसिंग और री-डेवलपमेंट मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत बड़े प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स को भी शामिल किया जाता है।
हालांकि आवास विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में सीमित संख्या में ईडब्ल्यूएस फ्लैट्स जोड़ने से शहर की वास्तविक किफायती आवास जरूरत पूरी नहीं हो रही है।
अधिकारियों को बजट फ्रेंडली प्रोजेक्ट पर काम करने के निर्देश दिए हैं। उनसे कहा है कि आम नागरिकों के लिए किफायती आवास के प्रोजेक्ट पर काम करें। ताकि निम्न व मध्यम वर्ग के नागरिकों को अच्छे आवास मिल सकें। – ओम जैन, अध्यक्ष, एमपी हाउसिंग बोर्ड




